दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में ईडी द्वारा अनिल अंबानी ग्रुप की प्रॉपर्टी अटैच (कुर्की) करने के खिलाफ 2 कंपनियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि ये याचिका मुंबई में दायर क्यों नहीं की गई? क्योंकि यहां इन पर सुनवाई करने का शायद उसके पास अधिकार न हो. जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि कंपनी मुंबई में है और इसलिए कार्रवाई वहीं शुरू होनी चाहिए. हम यहां क्यों सुनवाई करें? यह मामला मुंबई क्यों नहीं जाना चाहिए?

सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल रिलायंस रियल्टी और कैंपियन प्रॉपर्टीज लिमिटेड कंपनियों की ओर से पेश हुए और उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट याचिकाओं पर सुनवाई कर सकता है और उनके पास एक केस है. इस बीच ईडी की ओर से एडवोकेट जोहेब हुसैन और विवेक गुरनानी पेश हुए और कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी पहले ही इस मामले को देख रही है और पिटीशनर्स को अथॉरिटी के सामने अपनी दलीलें रखनी चाहिए.

30 जनवरी को अगली सुनवाई

कुछ देर सुनवाई के बाद जस्टिस कौरव ने मामले में याचिकाकर्ताओं से याचिका की मेंटेनेबिलिटी (सुनने योग्य है या नहीं) पर छोटे नोट्स फाइल करने को कहा. दिल्ली हाई कोर्ट मामले में अगली सुनवाई 30 जनवरी को करेगा. जानकारी के मुताबिक, ईडी ने PMLA के सेक्शन 5(1) के तहत रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की अलग-अलग एंटिटीज से जुड़ी कई हजार करोड़ से ज़्यादा की प्रॉपर्टीज़ को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया है.

19,694 रुपये करोड़ अभी भी बकाया

ईडी अनिल अंबानी की कंपनियों पर बैंक लोन के कथित गलत इस्तेमाल, लोन एवरग्रीनिंग, रिलेटेड पार्टीज़ को डायवर्जन, शेल एंटिटीज के जरिए रूटिंग और फंड्स की साइफनिंग के आरोपों की जांच कर रहा है, जिससे बैंकों द्वारा बड़े नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) और फ्रॉड डिक्लेरेशन हुए. ईडी ने दावा किया है कि साल 2010-12 के बाद से आरकॉम (रिलायंस कम्युनिकेशंस) और इसकी ग्रुप कंपनियों ने भारतीय बैंकों से हज़ारों करोड़ रुपए जुटाए, जिनमें से ₹19,694 करोड़ अभी भी बकाया हैं.

ईडी की जांच में दावा

ये एसेट्स NPA हो गए और 5 बैंकों ने आरकॉम के लोन अकाउंट्स को फ्रॉड घोषित कर दिया. ईडी की जांच में दावा किया गया है कि एक बैंक से एक एंटिटी द्वारा लिए गए लोन का इस्तेमाल दूसरी एंटिटीज द्वारा दूसरे बैंकों से लिए गए लोन को चुकाने, संबंधित पार्टियों को ट्रांसफर करने और म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करने के लिए किया गया, जो लोन के सैंक्शन लेटर की शर्तों का उल्लंघन था.

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